मिट्टी के बर्तन के फायदे

मिट्टी के जादूगर कुमार मिट्टी को कभी धन की देवी लक्ष्मी कभी ज्ञान की देवी सरस्वती तो कभी सिद्धांदाता भगवान तो कभी दीपों का रूप देने वाले कुमार इस डिजिटल युग में पीछे क्यों छोड़ते जा रहे हैं 

मिट्टी को अपनी उंगलियों से मनचाहा आकर  देने वाले कुमारों की  जिंदगी पीछे छूट रही है इसके बावजूद कि हम सभी जानते हैं कि पर्यावरण और सेहत के लिए आज से मिट्टी के बर्तन अच्छे होते हैं कुम्हारों को प्रजापति के नाम से भी जाना जाता है कहा जाता है कि भगवान प्रजापति ने ब्रह्मांड की रचना की थी वैसे तो छिटपुट तरीके से कुम्हार देशभर में रहते हैं लेकिन मुख्य तौर पर वह महाराष्ट्र हिमाचल प्रदेश मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ झारखंड बिहार उत्तर प्रदेश राजस्थान आदि में बहु  संख्या में निवास करते हैं मिट्टी के बर्तन का इतिहास मिट्टी के बर्तन का प्रयोग ईसवी पूर्व 15000 साल पहले से किया जा रहा है तो प्राचीन काल में मिट्टी से बने बर्तनों से विभिन्न कला कर्मों के विभाजन किया जाता था शुरू से मिट्टी के बर्तन इंसान के लिए महत्वपूर्ण है इसी वजह से मिट्टी के बर्तन के विभिन्न स्वरूप को भारत भर में देखा जाता है नवपाषाण काल में मिट्टी के बर्तन हाथ से बनाए जाते थे हड़प्पा कालीन मिट्टी के बर्तन रंगीन एवं विविध आकार के होते थे इनका रंग आमतौर पर काली पर चमकीली चित्र आदि होता था मिट्टी के बर्तन के फायदे मिट्टी के बर्तन का इस्तेमाल कई हजार सालों पहले इस्तेमाल किया जाता रहा है क्योंकि मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल के फायदे हैं आयुर्वेदिक के अनुसार अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीमी आंच में मिट्टी के बर्तन में पकाना चाहिए दरअसल मिट्टी के बर्तन में ऊष्मा को अवशोषित करने की क्षमता और लोहे के बर्तनों के मुकाबले कम होती है जिसके कारण ज्यादा गर्म होने पर इनके टूटने का खतरा बना रहता है पर धीमी आंच पर आसानी से इस में भोजन बनाया जा सकता है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदे मंद है आधुनिक बर्तनों की अपेक्षा गर्म खाद्य पदार्थों को अधिक समय तक गर्म रखता है और ठंडे खाद पदार्थों को अधिक देर तक ठंडा रखता है तो रखता है मिट्टी के बर्तन में रखा भोजन जल्दी खराब भी नहीं होता इंसान को अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रोज 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्वों का सेवन करना चाहिए जो हम मिट्टी के लिए बर्तन में खाना बनाने से मिल सकता है तो एलमुनियम के प्रेशर कुकर में खाना बनाने से खाद पदार्थों के 87 पोस्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं पीतल के बर्तन में खाना बनाने से पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं जबकि मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से खाद्य पदार्थ में मौजूद सारे पोस्टिक तत्व सुरक्षित रहते हैं एलमुनियम के प्रेशर कुकर में खाना बनाने से टीवी डायबिटीज आत्मा लकवा आदि खतरनाक बीमारियां हो सकती है क्योंकि धातु के बर्तनों में कई घातक रसायन होते हैं जो धातु के गर्म होने पर पिघल कर खाद्य पदार्थों के साथ  मिल जाते हैं जबकि मिट्टी के बर्तन कैल्शियम फास्फोरस आयरन जिंक सल्फर आदि तत्व पाए जाते हैं जो खाद पदार्थों के साथ मिलकर भोजन में स्वादिष्ट बनाए हैं साथ ही हमें स्वास्थ्य बने रहने की भी मदद करते हैं इन्हीं कारणों से आज हम प्राचीन मंदिरों में प्रसाद मिट्टी के बर्तन में बनाया जाता है मिट्टी के बर्तन पर्यावरण के अनुकूल होते हैं यदि संभालकर इसका इस्तेमाल किया जाता है तो लंबे समय तक इसका उपयोग किया जा सकता है यह मिट्टी से बने होते टूट कर पुनः मिट्टी में मिल जाते हैं जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता भारत में मिट्टी के बर्तन धातुओं का उपयोग वर्तमान में मुकाबले सस्ते भी होते हैं शहरों में लोगों को इस बात का डर रहता है की मिट्टी के बर्तन में सफाई नहीं की जा सकती इसका कारण इसके इस्तेमाल से बीमारियां हो सकती है लेकिन यह धारण पूरी तरह से गलत है इसकी सफाई करना बहुत ही आसान है लोगों को यह धारणा है कि सिर्फ मिट्टी के चूल्हे पर ही मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन यह संकल्प पूरी तरह से गलत है इसका इस्तेमाल गैस के चूल्हे पर भी आसानी से किया जा सकता है आजकल गांव और कस्बा नमो शहरों में चीन में बने दिए देव देवता हैं खिलौने आदि बिक रहे हैं क्योंकि चीन में मिट्टी के उत्पाद सस्ते होते हैं दरअसल हमारे देश में शहरों में और कस्बा शहरों में अब मिट्टी मिलना मुश्किल हो गया है हर तरफ इमारतों का जाल बिछ गया है मिट्टी मिलना मुश्किल हो गया है रंगों की कीमत भी गुणवत्ता वृद्धि है तो मिट्टी और रंगों की लागत बढ़ने से मिट्टी के उत्पादों की कीमत बढ़ गई है मिट्टी के बर्तनों की भी मांग खत्म हो चुकी है गर्मी में भी लोग पानी के ठंडे रखने के लिए मिट्टी के मटके का इस्तेमाल नहीं करते हैं मिट्टी के बर्तन में लोग खाने बनाना भी पसंद नहीं करते मिट्टी के बर्तन की उपेक्षा की वजह से कुम्हार आज बेरोजगार हो गया है उन्हें अपने परंपरागत पैसे के पुनः वर्ष की मिट्टी के बर्तन के फायदे कोई आशा भी नहीं है इसलिए वह मिट्टी के बर्तनों बनाना बंद कर के दूसरे पेशे को अपनाने लगे हैं 


Ankit pachouri journalist 

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